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जिंदगी का अनोखा सच

⛹️⛹️कहानी ए जिंदगी ⛹️⛹️

मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है जिंदगी को ढंग बदलते देखा है. → वो ओ चलते थे तो शेर के चलने का होता था गुमान, उनको भी पांव उठाने के लिए सहारे को तरसते हैं।

देखा

जिनकी नजरों की चमक देख सहम जाते थे लोग. उनकी नजरों को बरसात की

तरह रोते देखा है।।

जिनके

हाथों

से

इसोरे से टूट जाते उन्हीं हाथों को की तरह पत्तों पत्र थर-थर कापते देखत है।

जिनकी आवाज से कभी बिजली

के कड़कने का होता था भरम

उनके होठों पर भी चुप्पी का ताला देखा सुबरन... ये जवानी मे ताकत दोलत

सब कूदते की उनासत हैं इनके रहते हुए भी इसान

को बेंजान हुआ देखा है अपने आज पर इतना ना इतराना

मेरे

यार. वक्त की धारा में मैंने अच्छे अच्छा मजबूर हुआ देखा

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