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मेरा गांव की धरती

तू जितना पोज देकर तेरे शहर की छवि लगती हैं उस से तो सुंदर मेरा खेत पगली
तू शहर में जाकर खुश हैं हम तो वाह जहा शहर वाले भी जाने के लिए तरस ते है मेरी जान 
भले ही गर्मी में आग बरसे और सर्दी में ओले पर मेरे गांव की बराबरी नहीं हो पाएगी मेरी जान 
हमे पता की तेरे नसीब कुछ इस तरह थे की तुझे समंदर का किनारा मिल गया
पर हम वो परिंदे है मेरी जान की चाहे किनारा ना भी मिले तो समंदर में ही साम्राज्य बना देंगे  

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